देवदरवारिष्ट के फायदे नुक्सान उपयोग विधि साइड इफ़ेक्ट एवं मूल्य Devadarvarishta (Devadarvarishtam) Uses Benefits Side Effects & Price in hindi

By | August 15, 2020

देवदरवारिष्ट क्या है? What is Devadarvarishta (Devadarvarishtam) in hindi

देवदरवारिष्ट (Devadarvarishta (Devadarvarishtam)) एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से कब्ज, बवासीर, मूत्र विकारों, बुखार, malabsorption सिंड्रोम, पेट फूलना, dysuria, leucorrhoea, गर्भाशय के विकारों, चुभन (खुजली), एक्जिमा, सोरायसिस, और अन्य त्वचा रोगों आदि में सफलतापूर्वक प्रयोग की जाती है । यह औषधि बहुत ही अच्छी रक्तशोधक भी है । यह रक्त में से विषैले पदार्थों (टॉक्सिंस) को दूर कर देती है तथा लीवर की कार्यप्रणाली में सुधार करती हैं ।

इस औषधि का प्रमुख घटक द्रव्य देवदार होता है । देवधार के वृक्ष हिमालय क्षेत्र में पाए जाते हैं । देवदार के अतिरिक्त इस औषधीय में दंतीमूल, मंजिष्ठा, अगर, हल्दी, दारूहल्दी, नागरमोथा, वायविडांग, अर्जुन की छाल, अजवाइन, कुटज, चित्रक मूल, सफेद चंदन, गिलोय, कुटकी, त्रिजात, त्रिकटु, नागकेसर एवं धाय के फूल जैसे जड़ी बूटियां मौजूद होती हैं ।

जिस कारण इस औषधि में आम दोष नाशक एवं रक्त दोष नाशक गुण मौजूद होते हैं । यही कारण है कि यह औषधि बहुत ही अच्छे एंटीबैक्टीरियल दवा होती है जो बुखार, त्वचा रोगों एवं अन्य विभिन्न रोगों को दूर करने में मदद करती है । यह विभिन्न रोगों के लिए एक शानदार आयुर्वेदिक दवा है ।

देवदरवारिष्ट के घटक द्रव्य Devadarvarishta (Devadarvarishtam) ingredients in hindi

इस ओषधि के घटक द्रव्यों की पूरी सूची नीचे दी गई है।

घटक मात्रा
देवदरू (देवदार देवदार या हिमालयी देवदार) – देवदारु देवड़ा 50 भागों
वासाका या आदुलसा (मालाबार नट) – अधतोदा वासिका 20 भागों
इंद्रायवा – होलेरहेना एंटीडिसेंटेरिका सीड्स 10 भागों
दंती (दंतिमूल या हस्तिदंती) – बालिओस्पेरम मोंटानम 10 भागों
मंजिष्ठा – रूबिया कॉर्डिफ़ोलिया 10 भागों
तगर – वलेरियाना वालिचाइ 10 भागों
हल्दी (हल्दी) – करकुमा लोंगा 10 भागों
दारूहल्दी (दारुहरिद्रा) – बर्बेरिस अरिस्टाटा 10 भागों
रसना – प्लूसी लांसोलता 10 भागों
नागरमोथा या मुस्ताक (नट ग्रास) – साइपरस रोटंडस 10 भागों
शिरीष 10 भागों
वायविडंग (झूठी काली मिर्च) – एम्बेलिया रिब्स 10 भागों
खदिरा (काटेचू) – बबूल केचुए 10 भागों
अर्जुन छाल – टर्मिनलिया अर्जुन 8 भागों
अजवाईन (कैरम सीड्स) – ट्रेकिस्पर्मम अम्मी 8 भागों
कुरची (कुताज) – होलेरहेना एंटिडिसेंटरिका (प्यूबसेन्स) 8 भागों
सफ़ेद चंदन (सफ़ेद चंदन) – संताल एल्बम 8 भागों
गुडूची (गिलोय या हार्टलीफ मूनसीड) – तिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया 8 भागों
चित्रकमूल – प्लंबागो ज़ेलेनिका 8 भागों
कुटकी – पिकारसिजा कुर्रोआ 8 भागों
पानी 2048 भाग

हर्बल सामग्री और 2048 भागों के ऊपर के पानी से काढ़ा तैयार करें। इसे घटाकर 512 भाग तरल सामग्री / काढ़ा करें। फिर इसे ठंडा होने के लिए छोड़ दें। काढ़े को छान लें। जब काढ़ा थोड़ा गर्म होता है, तो निम्नलिखित सामग्री जोड़ें।

धातकी फूल- वुडफोर्डिया फ्रूटिकोसा 16 भागों
शहद – शहद 300 भाग
त्रिजात (दलचीनी, तेजपत्ता और इलाची ) 4 भागों
त्रिकटू (काली मिर्च, लंबी मिर्च और अदरक) 2 भागों
प्रियंगु – कैलीकार्पा मैकलॉफिला 2 भागों
नागकेसर – मेसुआ फेरिया 1 भाग
  1. इन सामग्रियों को मिलाने के बाद, मिट्टी के धब्बों वाले कपड़े से आसा बर्तन को सील कर दें। इसे आसव स्थान में 30 दिनों के लिए छोड़ दें।
  2. 30 दिनों के बाद, तरल (देवदारविराशि) को फ़िल्टर करें और इसे खाद्य-ग्रेड की बोतलों में संरक्षित करें।

देवदरवारिष्ट के ओषधिय गुण Devadarvarishta (Devadarvarishtam) properties in hindi

इस दवा में निम्नलिखित औषधीय गुण मोजूद होते हैं:

  • आमपाचक
  • detoxifying
  • आमविष नाशक
  • Blood Detoxifier (रक्त को शुद्ध करता है)
  • सूजनरोधी
  • ज्वरनाशक
  • रोगाणुरोधी, जीवाणुरोधी
  • गर्भाशय detoxifier
  • कब्ज नाशक
  • बवासीर नाशक
  • hepatoprotective
  • antispasmodic
  • पाचन एवं उत्तेजक
  • क्षुधावर्धक
  • cholagogue
  • हेपेटिक उत्तेजक
  • emmenagogue
  • डिम्बग्रंथि उत्तेजक
  • Nephroprotective

देवदरवारिष्ट के दोष कर्म Dosha Karma in hindi

यह दवा वात एवं कफ दोष को शांत करती है एवं पित्त को बढाती है । इसलिए इस दवा को उन लोगों को प्रयोग नहीं करना चाहिए जिन्हें बढे हुए पित्त की समस्या होती है ।

देवदरवारिष्ट के चिकित्कीय संकेत Devadarvarishta (Devadarvarishtam) Benefits in hindi

इस दवा का सेवन करने से निम्न रोगों में आराम मिलता है ।

  • कब्ज़
  • नॉन ब्लीडिंग पाइल्स
  • बुखार
  • Malabsorption Syndrome
  • पेट फूलना
  • Pyuria
  • श्वेतकमेह
  • Lipuria
  • पेशाब में जलन
  • मूत्र विकार
  • प्रदर
  • यूटेराइन फाइब्रॉयड
  • डिम्बग्रंथि पुटी
  • डिंबक्षरण
  • एनोव्यूलेशन के कारण महिला बांझपन
  • कष्टार्तव
  • amenorrhea
  • प्रसव के बाद होने वाली पीठ का दर्द
  • प्रसवोत्तर बुखार
  • ल्यूकोरिया (दुर्गंध, ऐंठन और दर्द के साथ स्त्राव)
  • गर्भाशय की सुस्ती

देवदरवारिष्ट के उपयोग एवं फायदे Devadarvarishta (Devadarvarishtam) Uses in hindi

जैसा कि हमने आपको पर बताया यह औषधि मुख्य रूप से गर्भाशय, अंडाशय, यकृत रोगों, त्वचा रोगों एवं आंतों से संबंधित समस्याओं के निदान के लिए प्रयोग की जाती है । यह इन सभी अंगों में अतिरिक्त कफ एवं आम दोष को भी दूर करती हैं ।

प्रसव के उपरांत होने वाली समस्याओं में

यह औषधि बहुत ही अच्छी डिटॉक्सिफायर है, जिस कारण यह प्रसव के उपरांत गर्भाशय से विषैले पदार्थों को दूर कर देती है । गर्भाशय से संबंधित समस्याओं में दशमूलारिष्ट का सेवन भी किया जाता है ।

दोनों में अंतर यह है कि यदि रोगी के शरीर में कफ दोष एवं आम दोष की अधिकता है तो ऐसी स्थिति में देव्दारिष्ट का प्रयोग किया जाता है । जबकि यदि रोगी के शरीर में वातदोष की अधिकता है तो ऐसे में दशमूलारिष्ट का सेवन ज्यादा लाभदायक होता है ।

बांझपन दूर करने में लाभदायक

बांझपन को दूर करने के लिए एक लाभदायक होती है । यह अंडाशय से अंडों को अधिक मात्रा में निकालती है जिस कारण महिला के गर्भवती होने की संभावना बढ़ जाती है । यह औषधि डिंबग्रंथि को उत्तेजित करती है तथा बांझपन मेे लाभ पहुंचाती हैं ।

लिकोरिया में लाभदायक

इस औषधि का सबसे अच्छा फायदा लिकोरिया में होता है । लिकोरिया को महिलाओं का शत्रु कहा जाता है । इस रोग में महिलाओं की योनि से गाडा, पीलापन लिए हुए, दुर्गंध युक्त चिपचिपा पदार्थ निकलता है । इस स्थिति में इस औषधि के साथ आरोग्यवर्धिनी वटी एवं प्रद्रांतक लौह का सेवन कराने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

निर्धारित मात्रा में एवं चिकित्सक के परामर्श अनुसार सेवन करने पर इस औषधि का कोई दुष्प्रभाव नहीं है । आयुर्वेदिक ग्रंथों में विशेष रुप से कहा गया है कि 18 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं को इस औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए ।

संबंधित प्रश्न FAQ

क्या गर्भवती महिलाओं को इस औषधि का सेवन करना सुरक्षित है?

जी नहीं । गर्भावस्था के दौरान इस औषधि का सेवन करना बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है । गर्भावस्था के दौरान इस औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए ।

क्या स्तनपान कराने वाली माताओं के द्वारा इस औषधि का सेवन करना सुरक्षित है?

स्तनपान कराने वाली माताओं एवं उनके शिशुओं में इस औषधि का सेवन करने से किसी भी प्रतिकूल प्रभाव की सूचना उपलब्ध नहीं है ।

क्या इस औषधि का उपयोग प्रसव के उपरांत किया जा सकता है?

जी हां । इस औषधि का उपयोग प्रसव के उपरांत गर्भाशय की सफाई एवं विभिन्न समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है ।

क्या यह एक सुरक्षित ओषधि है?

जी हां । 18 वर्ष से बड़ी उम्र की महिलाओं के लिए यह सुरक्षित होती है ।

क्या इस औषधि को बच्चों को दिया जा सकता है?

जी नहीं । इस औषधि को बच्चों को देना सुरक्षित नहीं है ।

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