दशमूलारिष्ट सिरप के गुण उपयोग फायदे एवं नुक्सान Dasamoolarishtam Syrup uses and benefits in hindi

By | May 1, 2020

दशमूलारिष्ट सिरप क्या है? Dasamoolarishtam Syrup in hindi

 
दशमूलारिष्ट एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से महिलाओं के प्रसव के उपरांत होने वाली समस्याओं एवं कमजोरी में लाभदायक होती है । इसके अतिरिक्त दशमूलारिष्ट का सेवन करने से महिलाओं की मासिक धर्म के समय होने वाली अनेकों समस्याओं में भी लाभ मिलता है ।
 
दशमूलारिष्ट में 50 से भी अधिक जड़ी बूटियां प्रयोग की जाती है जिससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह ओषधि कितनी गुणकारी होगी । महिलाएं इस औषधि को एक टॉनिक के रूप में इस्तेमाल करती हैं तथा ऐसी महिलाएं जो प्रसूता है या मासिक धर्म की समस्याओं से जूझ रही हैं उनके लिए यह टॉनिक एक वरदान की तरह है ।
 
दशमूलारिष्ट में अश्वगंधा, मंजीठ एवं द्राक्षा सहित अन्य जड़ी बूटियां होती हैं, जो प्रसव के बाद आई हुई कमजोरी को दूर करती है तथा महिलाओं को ताकत प्रदान करती हैं । इसके अतिरिक्त दशमूलारिष्ट कमजोरी के कारण आई हुई पाचन संस्थान की गड़बड़ी एवं मेटाबॉलिज्म की खराबी को भी सही करती हैं । जिससे महिलाएं बिल्कुल स्वस्थ एवं निरोगी हो जाती हैं और नई उर्जा एवं ताकत महसूस करती हैं।

दशमूलारिष्ट के घटक द्रव्य

Dasamoolarishtam

 Syrup ingredients

इस 

✦ सभी दस जड़ों का मिश्रण – 2 किलो ✦ पिप्पली – 80 ग्राम
✦ चित्रक छाल – 1 किलो ✦ सुपारी – 80 ग्राम
✦ पुष्कर मूल – 1 किलो ✦ कचूर – 80 ग्राम
✦ लोध्र – 800 ग्राम ✦ हल्दी – 80 ग्राम
✦ गिलोय -800 ग्राम ✦ सोया (सूवा) पद्म काठ – 80 ग्राम
✦ आंवला – 640 ग्राम ✦ नागकेशर – 80 ग्राम
✦ जवासा – 480 ग्राम ✦ नागर मोथा – 80 ग्राम
✦ खैर की छाल या कत्था – 320 ग्राम ✦ इन्द्र जौ – 80 ग्राम
✦ विजयसार – 320 ग्राम ✦ काकड़ासिंगी – 80 ग्राम
✦ गुठली रहित बड़ी हरड़ – 320 ग्राम ✦ विदारीकन्द – 80 ग्राम
✦ कूठ – 80 ग्राम ✦ शतावरी – 80 ग्राम
✦ मजीठ – 80 ग्राम ✦ असगन्ध – 80 ग्राम
✦ देवदारु – 80 ग्राम ✦ वराहीकन्द – 80 ग्राम
✦ वायविडंग – 80 ग्राम ✦ मुनक्का – ढाई किलो
✦ मुलहठी – 80 ग्राम ✦ शहद – सवा किलो
✦ भारंगी – 80 ग्राम ✦ गुड़ – 30 किलो
✦ कबीटफल का गूदा – 80 ग्राम ✦ धाय के फूल – सवा किलो
✦ बहेड़ा – 80 ग्राम ✦ शीतलचीनी – 80 ग्राम
✦ पुनर्नवा की जड़ – 80 ग्राम ✦ सुगन्धबाला या खस – 80 ग्राम
✦ चव्य – 80 ग्राम ✦ सफ़ेद चन्दन – 80 ग्राम
✦ जटामासी – 80 ग्राम ✦ जायफल – 80 ग्राम
✦ फूल प्रियंगु – 80 ग्राम ✦ लौंग – 80 ग्राम
✦ सारिवा – 80 ग्राम ✦ दालचीनी – 80 ग्राम
✦ कालाजीरा – 80 ग्राम ✦ इलायची – 80 ग्राम
✦ निशोथ – 80 ग्राम ✦ तेजपात – 80 ग्राम
✦ रेणुका बीज (सम्भालू बीज) – 80 ग्राम ✦ पीपल – 80 ग्राम
✦ रास्ना – 80 ग्राम ✦ नागकेशर – 80 ग्राम
  ✦ कस्तूरी – 3 ग्राम

दशमूलारिष्ट के फायदे

Dasamoolarishtam

Syrup uses in hindi

  • दशमूलारिष्ट का सबसे प्रमुख फायदा प्रसव के बाद आई हुई कमजोरी को दूर करना होता है ।
  • प्रसव के पश्चात महिलाओं को अनेकों समस्याएं घेर लेती हैं, ऐसे में दशमूलारिष्ट का सेवन करने से बहुत ज्यादा लाभ मिलता है ।
  • प्रसव के पश्चात गर्भाशय में सूजन आ जाती है एवं दर्द होता है ऐसे में दशमूलारिष्ट का सेवन करने से लाभ मिलता है ।
  • इस औषधि का सेवन करने से स्तनों में दूध की वृद्धि होती है ।
  • यह औषधि वायु रोगों जैसे गठिया, आमवात एवं संधिवात में भी फायदा करती है ।
  • कफ रोगों एवं श्वास रोगों में भी इसका सकारात्मक प्रभाव देखा गया है ।
  • कई बार प्रसव के पश्चात या मासिक धर्म के समय महिलाओं की भूख खत्म हो जाती है एवं उनकी भोजन में अरुचि हो जाती है, इस समस्या का निदान करने के लिए दशमूलारिष्ट का सेवन कराने से लाभ मिलता है ।
  • यह दवा महिलाओं की ग्रहणी की समस्या में लाभदायक होती है ।
  • यह मंदाग्नि को ठीक करके पाचन संस्थान को बल प्रदान करती है ।
  • इस औषधि का सेवन करने से पेशाब में जलन ठीक होती है ।
  • इस प्रकार हम कह सकते हैं कि दशमूलारिष्ट महिलाओं की प्रसंव के समय एवं मासिक धर्म के समय होने वाली सभी समस्याओं की एक औषधि है जिसे महिलाएं टोनीक के रूप में इस्तेमाल करती हैं ।

सेवन विधि एवं मात्रा

औषधीय मात्रा (Dosage)

बच्चे  n/a
वयस्क 15 से 30 मिलीलीटर

सेवन विधि (Directions)

दवा लेने का उचित समय (कब लें?) खाना खाने के बाद लें
दिन में कितनी बार लें? 2 बार – सुबह और शाम
अनुपान (किस के साथ लें?) गुनगुने पानी के साथ
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) चिकित्सक की सलाह लें

सावधानियां Precautions

दशमूलारिष्ट का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए क्योंकि अधिक मात्रा में इस औषधि का सेवन करने से आपको निम्न प्रकार की समस्या हो सकती हैं ।

  • मुंह में छाले होना
  • पेट में जलन होना
  • एसिडिटी होना
  • उल्टी होना
  • सिर में दर्द होना
  • घबराहट व बेचैनी होना इत्यादि ।

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