Brahmi Vati Benefits in Hindi ब्राह्मी वटी के गुण, फायदे, उपयोग एवं दुष्प्रभाव

By | February 29, 2020


ब्राह्मी वटी का परिचय Introduction of Brahmi Vati in Hindi

नमस्कार दोस्तों आज हम ब्राह्मी वटी (Brahmi Vati) के बारे में वटी के बारे में विस्तार से बात करेंगे । ब्राह्मी वटी एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र से जुड़ी हुई बीमारियों में प्रयोग की जाती है । ब्राह्मी वटी का प्रमुख घटक ब्राह्मी होता है, जिसका कार्य प्रमुख रूप से मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र को ऊर्जा प्रदान करना होता है ।

ब्राह्मी जड़ी बूटी का वर्णन हमारे प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथो जैसे चरक संहिता एवं सुश्रुत संहिता में भी है । इन ग्रंथों में ब्राह्मी वटी को मस्तिष्क के लिए अमृत कहां गया है । ब्राह्मी जड़ी बूटी मुख्य रूप से भारत में हिमालय की तराई में पाई जाती है । आइए एवं विस्तार से जानते हैं कि ब्राह्मी वटी के क्या-क्या लाभ होते हैं ।

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ब्राह्मी वटी क्या है Brahmi Vati in Hindi 

ब्राह्मी वटी एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसका प्रमुख कार्य मस्तिष्क को ताकत प्रदान करना एवं तनाव कम करना होता है । बहुत अधिक मानसिक परिश्रम करने से मस्तिष्क की नाड़ियाँ कमजोर हो जाती हैं ।

जिस कारण व्यक्ति की याददाश्त कमजोर होना, स्वभाव में चिड़चिड़ापन होना, रात को नींद ना आना तथा घबराहट एवं बेचैनी जैसी समस्याएं हो जाती हैं । इस स्थिति में ब्राह्मी वटी को लेने से बहुत ज्यादा आराम मिलता है।

आइए दोस्तों अब हम ब्राह्मी वटी के फायदों के बारे में विस्तार से बात करते हैं । ब्राह्मी वटी के फायदे हमने नीचे दिए हैं, आप इस लेख को एंड तक पढ़े ।

ब्राह्मी वटी के घटक Brahmi Vati Ingredients

ब्राह्मी
काली मिर्च
पिप्पली
विडंग
शिलाजीत
बंग भस्म (वंग भस्म)
अभ्रक भस्म
रस सिंदूर


याददाश्त बढ़ाने में लाभकारी ब्राह्मी वटी Brahmi Vati Benefits in Memory Loss

ब्रह्मी बटी आयुर्वेद की एक ऐसी आयुर्वेदिक औषधि है जिसका सही अनुपात में सेवन करने से दिमाग की कमजोरी जैसे याददाश्त कमजोर होना, बार बार सिर में दर्द होना, रात को नींद ना आना आदि समस्या में बहुत अधिक लाभ मिलता है ।

जो लोग मस्तिष्क से संबंधित अधिक कार्य करते हैं जैसे कि डॉक्टर, इंजीनियर, अध्यापक एवं स्टूडेंट्स इत्यादि, ऐसे लोगों को ब्राह्मी वटी एक पोस्टिक रसायन की तरह लाभ पहुंचाती है ।

हृदय रोगों में लाभकारी ब्राह्मी वटी Brahmi Vati Benefits in Heart Problems

ब्राह्मी वटी में जो जड़ी बूटियों प्रयोग की जाती हैं, उनमें से कुछ जड़ी बूटियां ऐसी होती हैं जो हृदय रोग से संबंधित समस्याओं में लाभ पहुंचाती हैं । कभी-कभी वायु रोग के कारण भी ह्रदय में दर्द होना, घबराहट होना आदि समस्याएं आ जाती हैं । ऐसे में किसी योग्य चिकित्सक की देखरेख में ब्राह्मी वटी का प्रयोग कराया जा सकता है ।

अनिद्रा में लाभकारी ब्राह्मी वटी Brahmi Vati Benefits in Imsomnia

बहुत ज्यादा मानसिक श्रम करने से दिमाग की नसों में सूजन आ जाती है । जिस कारण बार-बार मस्तिष्क में एक ही विचार आते रहते हैं,  जिस कारण व्यक्ति को जल्दी से नींद नहीं आती है । ब्रह्म वटी का सेवन करने से मस्तिष्क की नाड़ियों को आराम मिलता है तथा उनकी सूजन कम होती है और व्यक्ति को नींद आने लगती है ।

हिस्टीरिया में फायदेमंद ब्राह्मी वटी Brahmi Vati Benefits in Hysteria

हिस्टीरिया एक ऐसी बीमारी है जो स्नायु रोग से जोड़कर देखी जाती है । यह रोग ज्यादातर 15 से 25 साल की लड़कियों या महिलाओं में ही देखा जाता है । इस रोग का प्रमुख कारण लड़कियों या महिलाओं में बहुत ज्यादा चिंता होना, परिवारिक कष्ट होना, धन की हानि होना, या पार्टनर के द्वारा सेक्स में लगातार असंतुष्ट अवस्था में छोड़ देना माना जाता है ।

इस अवस्था में महिलाएं अजीब सी हरकते करती है । इस रोग  में ब्राह्मी वटी का सेवन बहुत अधिक फायदेमंद सिद्ध हुआ है ।क्योंकि ब्राह्मी वटी स्नायु तंत्र पर अपना बहुत अच्छा प्रभाव डालती है ।

मिर्गी में लाभकारी ब्राह्मी वटी Brahmi Vati Benefits in Mirgi

जिन लोगों को मिर्गी का दौरा उठता होगा, जो बार बार बेहोश हो जाते हो उन्हें योग्य चिकित्सक की देखरेख में ब्राह्मी वटी का सेवन कराने से बहुत अधिक लाभ देखने को मिला है । मिर्गी की बीमारी में ब्राह्मी वटी के साथ सारस्वतारिष्ट का सेवन भी करना चाहिए, इससे बहुत अधिक लाभ मिलता है ।

स्नायु तंत्र को स्वस्थ रखने में लाभकारी ब्राह्मी वटी Brahmi Vati Benefits in Nervous System

ब्राह्मी वटी को यदि हम स्नायु तंत्र के लिए एक टॉनिक या रसायन कहें तो इसमें कुछ भी गलत नहीं होगा । ब्राह्मी वटी हमारे मस्तिष्क, नर्वस सिस्टम एवं स्नायु तंत्र को बहुत ज्यादा ताकत और ऊर्जा प्रदान करती है । किसी भी प्रकार के मानसिक रोग, उन्माद, तनाव, अनिद्रा, स्वभाव में चिड़चिड़ापन, हिस्टीरिया आदि बीमारियों में ब्राह्मी वटी का प्रयोग जरूर कराया जाता है ।

हाई ब्लड प्रेशर में लाभकारी ब्राह्मी वटी Bramhi Vati Benefits in High Blood Pressure

ब्राह्मी वटी हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप की समस्या में भी बहुत अच्छा फायदा करती है । क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर का संबंध हमारे मस्तिष्क से होता है ।

जब भी हमें बहुत ज्यादा मानसिक तनाव होगा तो हमारा ब्लड प्रेशर ज्यादा हो जाएगा, ऐसे में ब्राह्मी वटी का सेवन करने से मस्तिष्क में से तनाव पैदा करने वाले हारमोंस का स्तर सामान्य हो जाता है तथा ब्लड प्रेशर भी धीरे-धीरे करके नॉर्मल लेवल में आ जाता है ।

 

शुगर यानी डायबिटीज में फायदेमंद ब्राह्मी वटी Bramhi Vati Benefits in Diabetes

ब्राह्मी वटी का शुगर लेवल को कंट्रोल करने में भी लाभ देखा गया है । यदि डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए ब्राह्मी वटी के साथ-साथ Vasant Kusumakar Ras का प्रयोग किया जाए तो लाभ बहुत ही शीघ्र देखने को मिलता है । क्योंकि वसंत कुसुमाकर रस भी मधुमेह की एक सुप्रसिद्ध दवा है ।

खांसी में लाभकारी ब्राह्मी वटी Bramhi Vati Benefits in Cough

ब्राह्मी वटी में कुछ ऐसी जड़ी बूटियां प्रयोग की जाती हैं जिनमें ऐसे गुण होते हैं जो खांसी को दूर करने में सहायता करते हैं । खांसी की समस्या में ब्राह्मी वटी के साथ-साथ Sitopladi Churna का सेवन भी अवश्य ही करना चाहिए ।क्योंकि सितोपलादि चूर्ण खांसी की 1 सर्वश्रेष्ठ औषधि है ।

ब्राह्मी वटी के नुक्सान या दुष्प्रभाव Bramhi Vati Side Effects

ब्राह्मी वटी वैसे तो पूर्ण रूप से नेचुरल और सुरक्षित औषधि है तथा इसका कोई भी दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है ।लेकिन कभी-कभी इसके छोटे-मोटे दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं जो इस प्रकार हैं ।

भूख में कमी होना
सिर दर्द होना घबराहट होना
बेचैनी होना
त्वचा पर लाल दाने पड़ जाना
व्यक्ति का बेहोश हो जाना

ब्राह्मी वटी की खुराक एवं सेवन विधि Bramhi Vati Dosage and Directions

ब्राह्मी वटी की एक-एक गोली सुबह शाम ताजे पानी के साथ दी जा सकती हैं । ताजा पानी के अतिरिक्त दूध मक्खन मलाई आंवले का मुरब्बा या गुलकंद इत्यादि का प्रयोग भी किया जा सकता है । अधिक जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें ।

 

ब्राह्मी वटी (Brahmi Vati) से संबंधित कुछ प्रश्न Some important questions regarding Brahmi Vati

 

क्या ब्राह्मी वटी (Brahmi Vati) को शराब के साथ सेवन कर सकते हैं ?

नहीं ब्राह्मी वटी (Brahmi Vati) को शराब के साथ नहीं लेना चाहिए । इस दवा को ताजे पानी के साथ लेना चाहिए ।

क्या ब्राह्मी वटी (Brahmi Vati) को ड्राइविंग करने से पहले लिया जा सकता है ?

नहीं ब्राह्मी वटी (Brahmi Vati) को ड्राइविंग करने से पहले नहीं लेना चाहिए । क्योंकि कभी-कभी इस दवा के सेवन करने से चक्कर आना, सिर दर्द होना या रक्तचाप का घटना यानी कम होना जैसी समस्याएं हो सकते हैं । इसलिए गाड़ी चलाना सुरक्षित नहीं होगा ।

क्या ब्राह्मी वटी (Brahmi Vati) को लगातार लेने से नशे की आदत पड़ सकती है ?

नहीं । ब्राह्मी वटी (Brahmi Vati) को लेने से किसी प्रकार की लत नहीं पड़ती है ।

क्या जल्दी लाभ उठाने के लिए ब्राह्मी वटी (Brahmi Vati) की अधिक मात्रा ली जा सकती है ?

 

नहीं । ब्राह्मी वटी (Brahmi Vati) को एक निश्चित मात्रा में निश्चित अवधि के लिए ही लेना चाहिए । अधिक जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क करें ।

ब्राह्मी वटी (Brahmi Vati) को दिन में कितनी बार लिया जा सकता है ?

ब्राह्मी वटी (Brahmi Vati) की एक खुराक 125 मिलीग्राम से 250 मिलीग्राम तक होती है । दिन में दो खुराक लेना सुरक्षित होता है । अधिक जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क करें ।

क्या गर्भावस्था के दौरान ब्राह्मी वटी (Brahmi Vati) को लिया जा सकता है ?

गर्भावस्था के दौरान ब्राह्मी वटी (Brahmi Vati) को लेना सुरक्षित नहीं हो सकता है ।

क्या स्तनपान के दौरान ब्राह्मी वटी (Brahmi Vati) को लेना सुरक्षित होता है ?

स्तनपान के दौरान वसंत कुसुमाकर रस को लेना सुरक्षित हो सकता है । अधिक जानकारी के लिए अपने चिकित्सक से संपर्क करें ।

क्या ब्राह्मी वटी (Brahmi Vati) में चीनी होती है ?

नहीं । ब्राह्मी वटी (Brahmi Vati) में चीनी नहीं होती है ।

मस्तिष्क रोगों के उपचार के लिए क्या ब्राह्मी वटी (Brahmi Vati) को लिया जा सकता है ?

ब्राह्मी वटी मस्तिष्क रोगों के लिए एक श्रेष्ठ ओषधि है यह दवा उच्च रक्तचाप, अनिंद्र, मानसिक थकान व् याददाश्त कि कमजोरी के लिए एक उत्तम ओषधि है

ब्राह्मी वटी का मूल्य Brahmi Vati Price


ब्राह्मी वटी को कई फेमस ब्रांड्स कि कंपनिया बनाती है, जिनमे Baidyanath, Dabur, Patanjali का नाम अग्रणी है । आप ब्राह्मी वटी को online नीचे दिए गए लिंक से भी मंगा सकते हैं । 

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2 thoughts on “Brahmi Vati Benefits in Hindi ब्राह्मी वटी के गुण, फायदे, उपयोग एवं दुष्प्रभाव

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