अयस्कृति के गुण उपयोग फायदे एवं नुक्सान Ayaskriti uses and benefits in hindi

By | April 30, 2020

अयस्कृति क्या है? Ayaskriti in hindi

अयस्कृति (Ayaskriti) एक आयुर्वेदिक औषधि हैं जिसका उपयोग मुख्य रूप से रक्ताल्पता अर्थात एनीमिया, त्वचा रोगों एवं वजन घटाने के लिए किया जाता है । आकृति उत्तर भारत की ओषधि नहीं है, यह ओषधि मुख्य रूप से दक्षिण भारत में इस्तेमाल की जाती है और दक्षिण भारत की ही अनेकों आयुर्वेदिक फार्मेसियों जैसे Kottakkal के द्वारा इसका निर्माण भी किया जाता  हैं ।

  • सन्दर्भ ग्रन्थ: चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, अष्टांगहृदयम
  • दवा का नाम: अयस्कृति Ayaskriti
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: हर्ब और मिनरल युक्त
  • मुख्य उपयोग: मधुमेह, चयापचय विकार, मोटापा, ल्यूकोडार्मा, और एनीमिया।
  • मुख्य गुण: खून की कमी दूर करना
  • दोष इफ़ेक्ट: वात और कफ कम करना
  • गर्भावस्था में प्रयोग: बिना डॉक्टर की सलाह नहीं करें

यदि हम इस औषधि के नाम की बात करें तो इस औषधि का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है । अयस एवं कृति अर्थात एक ऐसी औषधि जिसका मुख्य घटक अयस अर्थात लोहा होता है क्योंकि संस्कृत में लोहे को अयस कहा जाता है । आइए अब हम विस्तार से इस औषधि के बारे में बात करते हैं ।

जैसा कि हमने आपको बताया कि इस औषधि में लोहा प्रचुर मात्रा में होता है इसलिए इस ओर जी का मुख्य प्रयोग एनीमिया एवं पीलिया जैसे रोगों में किया जाता है । इसके अतिरिक्त त्वचा रोगों, मूत्र संस्थान के रोगों एवं भूख ना लगना जैसी समस्या में भी इस औषधि का सेवन करने से लाभ मिलता है ।

अयस्कृति के घटक द्रव्य Ayaskriti ingredients in hindi

  • लोहा
  • शहद
  • गुड
  • श्वेत चन्दन
  • घृत
  • भृंग
  • पिप्पली
  • चव्य
  • चित्रक

इसके अतरिक्त इस ओषधि में लगभग 60 से भी ज्यादा जड़ी बूटियाँ डाली जाती हैं । सभी जड़ी बूटियों का वर्णन करना कठिन है । इसलिए हमने केवल कुछ ही जड़ी बूटियों का जिक्र किया है ।

अयस्कृति के चिकित्सीय गुण Ayaskriti benefits in hindi

  • एंटी इन्फ्लेमेटरी अर्थात सूजन को कम करने वाली
  • anti-obesity मोटापे को कम करने वाली दवा
  • एंटी हाइपर गलेसेमिक रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित रखने वाली
  • एंटी हाइपरलिपिडेमिक रक्त में लिपिड के स्तर को नियंत्रित रखने वाली
  • ऐपेटाइजर्स भूख में सुधार करने वाली
  • पाचन पाचन संस्थान को दुरुस्त रखने वाली

अयस्कृति के फायदे Ayaskriti uses in hindi

  • यह औषधि मुख्य रूप से एनीमिया एवं पीलिया रोग में लाभकारी होती है ।
  • इस औषधि में कृमि नाशक गुण होते हैं, इसलिए यह पेट एवं आंतों के कीड़ों को नष्ट कर देती है ।
  • त्वचा रोगों में लाभकारी होती है ।
  • इस ओषधि में ऐसी ऐसी जड़ी बूटियां होती हैं जो पाचन संस्थान पर अपना सकारात्मक प्रभाव डालती हैं । जिससे मंदाग्नि दूर होती हैं एवं भूख बढ़ती है ।
  • यह रक्त को शुद्ध करती है एवं शरीर में से विषैले पदार्थों को बाहर निकालती है ।
  • यह मूत्र संस्थान की समस्याओं जैसे पेशाब में जलन होना, पेशाब रुक रुक कर आना या बार बार आना जैसी समस्याओं में फायदा करती है ।
  • इसका सेवन करने से खून की कमी दूर होती है एवं शरीर स्वस्थ रहता है ।
  • यह दवा वजन कम करने में मददगार होती है ।
  • यह शरीर में से हर प्रकार के दर्द और सूजन को दूर करती है ।
  • त्वचा रोगों जैसे ल्यूकोडरमा में लाभकारी ।

अयस्कृति सेवन विधि एवं मात्र

औषधीय मात्रा (Dosage)

बच्चे(5 वर्ष की आयु से ऊपर) 5 से 10 मिलीलीटर
वयस्क 10 से 30 मिलीलीटर *
अधिकतम संभावित खुराक निर्दिष्ट नहीं है, लेकिन प्रति दिन 60 मिलीलीटर तक हो सकती है (विभाजित मात्रा में)

सेवन विधि (Directions)

दवा लेने का उचित समय (कब लें?) खाना खाने के तुरंत बाद लें
दिन में कितनी बार लें? 2 बार – सुबह और शाम
अनुपान (किस के साथ लें?) समान मात्रा पानी के साथ
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) चिकित्सक की सलाह लें

अयस्कृति के दुष्प्रभाव Ayaskriti side effects in hindi

सामान्यता इस औषधि का कोई दुष्प्रभाव नहीं है, लेकिन यदि आप इस औषधि को चिकित्सक के परामर्श के बिना ही सेवन करते हैं या अधिक मात्रा में सेवन करते हैं तो इससे आपको निम्न दुष्प्रभाव हो सकते हैं ।

  • छाती में जलन हो सकती है ।
  • पेट में जलन हो सकती है ।
  • सिर में दर्द, सिर चकराना, उल्टी होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं ।
  • घबराहट या बेचैनी हो सकती है ।

इस औषधि का सेवन कब ना करें?When it should be avoided?

इस औषधि का सेवन गर्भावस्था एवं स्तनपान के दौरान नहीं करना चाहिए । यदि रोगी अम्लपित्त प्रधान प्रकृति का है तो ऐसे रोगियों को भी इस दवा का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इस दवा का सेवन करने से अम्ल पित्त की मात्रा बढ़ जाती है । क्योंकि इस औषधि में लोहे की प्रचुर मात्रा होती है इसलिए इस औषधि का सेवन ज्यादा लंबे समय तक नहीं करना चाहिए ।

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