अष्ट चूर्णम के फायदे उपयोग एवं साइड इफ़ेक्ट Ashta Choornam Uses Benefits & Side Effects in Hindi

By | August 13, 2020

अष्ट चूर्णम क्या है? What is Ashta Choornam in hindi?

अष्ट चूर्णम जिसे ashta choornam, ashtachurnam, ashta churnam आदि नामो से जाना जाता है, एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से पाचन तंत्र की समस्याओं को दूर करने के लिए प्रयोग की जाती है । इस औषधि का सेवन करने से पाचन तंत्र की समस्याएं जैसे कब्ज, पेट गैस, भूख ना लगना,।पेट का फूलना, पेट में सूजन हो जाना एवं पेट दर्द में बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

यह औषधि वात एवं कफ नाशक होती है तथा इसका सेवन करने से पित्त की वृद्धि होती है । पित्तवर्धक होने के कारण यह यकृत को उत्तेजित करती है एवं पाचक रसों का स्राव बढ़ा देती है, जिस कारण यह पाचक एवं उत्तेजक के रूप में कार्य करती है ।

इसका सेवन करने से भूख बहुत अच्छी लगती है तथा पेट बिल्कुल हल्का हल्का रहता है । जिन लोगों को चिपचिपा मल आता है या पेट बिल्कुल अच्छी तरह साफ नहीं होता है उन्हें इस चूर्ण का सेवन करने से पेट बिल्कुल साफ हो जाता है तथा बार-बार शौच जाने की इच्छा नहीं रहती है । यह औषधि इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम की समस्या में भी बहुत अच्छा फायदा पहुंचाती है ।

अष्ट चूर्णम के घटक द्रव्य Ashta Choornam ingredients in hindi

त्रिकटू चूर्ण (काली मिर्च, अदरक, लंबी काली मिर्च) 3 भाग
अजमोदा (अजवाइन के बीज) – एपियम ग्रेवोलेंस 1 भाग
सेंधा नामक (सांध्य लवण) 1 भाग
सफ़ेद जीरा – सफेद जीरा बीज 1 भाग
काला जीरा – काला जीरा बीज 1 भाग
हिंगु – हींग 1 भाग

अष्ट चूर्णम के औषधीय गुण Ashta Choornam properties in hindi

Ashta Choornam में निम्न ओषधिय गुण मोजूद होते हैं।

  • क्षुधावर्धक
  • पाचन उत्तेजक
  • कामिनटिव
  • Antiflatulent
  • antispasmodic
  • सूजनरोधी
  • Hepato सुरक्षात्मक
  • एंटीऑक्सीडेंट
  • वसा दाहक
  • विरोधी हिपेटोमिगेली
  • कृमिनाशक

अष्ट चूर्णम के आयुर्वेदिक गुण Ayurvedic properties of Ashta Choornam in hindi

रस (स्वाद) मुख्य रूप से KATU (तीखा) और LAVANA (नमकीन)
गुण (मुख्य गुणवत्ता) LAGHU (लाइट), RUKSHA (सूखा), USHNA (हॉट),
VIRYA (क्षमता) USHNA (हॉट)
PRABHAVA (कार्रवाई) पाचन उत्तेजक और ऐपेटाइज़र
DOSHA KARMA (हास्य पर प्रभाव) कफ दोष एवं वात दोष वर्धक detoxifies पित्त दोष
धातु (ऊतक) प्रभाव RASA, RAKTA, MAMSA, MEDAS
संगठन प्रभाव पाचन तंत्र के अंग
मुख्य संकेत भूख और पेट की गांठ

अष्ट चूर्णम के चिकित्सकीय संकेत का Ashta Choornam Uses in hindi

अष्ट चूर्णम निम्न रोगों में सफलता पूर्वक प्रयोग किया जाता है

  • भूख में कमी
  • एनोरेक्सिया
  • आंतों की गैस या पेट फूलना
  • खाने के बाद पेट का भारीपन
  • मुख्य रूप से अधिक गैस के कारण पेट की गांठ महसूस होना
  • पेट दर्द मुख्य रूप से पेट में गैस के संचय के कारण होता है
  • अपूर्ण निकासी – जब रोगी शिकायत करता है की उसका चिपचिपा मल होता है और मल में श्लेष्म सामग्री के साथ शौच होता है
  • कब्ज (मुख्य रूप से अपूर्ण निकासी के रूप में वर्णित) – यकृत विकार और यकृत और पित्ताशय की थैली से पित्त की आपूर्ति में कमी के कारण
  • चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम – जब रोगी को मल त्याग करते समय पेट दर्द होता है
  • सूजन
  • वसायुक्त यकृत रोग (यकृत ज्वर)
  • दस्त
  • ढीली मल

अष्ट चूर्णम के फायदे एवं उपयोग Ashta Choornam Benefits in hindi

अष्ट चूर्णम जहां एक और वात एवं कफ को दूर करती है वहीं दूसरी ओर यह औषधि पित्त को बढ़ाती है । इस औषधि के निम्नलिखित फायदे होते हैं ।

भूख बढ़ाने में लाभदायक

फर्स्ट चूर्णम भूख बढ़ाने के लिए बहुत ही अच्छा कार्य करता है । यह चूर्ण यकृत एवं पित्ताशय से पाचक रसों के स्राव को बढ़ा देता है जिस कारण भोजन बहुत जल्दी हजम होता है एवं रोगी को भूख ना लगने की समस्या में आराम मिलता है ।

यदि बुखार,हेपिटाइटिस, पीलिया, लिवर की बीमारी या किसी अन्य बीमारी के कारण भूख ना लगने की समस्या हो गई हो तो ऐसी स्थिति में अष्ट चूर्णम का सेवन करने से लाभ मिल जाता है ।

यदि रोगी को पित्त की समस्या नहीं है तो इस औषधि के साथ सहायक औषधियों के रूप में द्राक्षासव, रजत भस्म एवं अभ्रक भस्म को दिया जा सकता है । लेकिन यदि रोगी को पित्त की समस्या है तो इस औषधि को नहीं देना चाहिए ।

इस स्थिति में रोगी का उपचार करने के लिए कामदुधा रस, प्रवाल पिष्टी, मुक्ता पिष्टी, द्राक्षासव, रजत भस्म एवं अभ्रक भस्म का सेवन कराया जाना चाहिए । इस औषधियों का सेवन किसी योग्य एवं अनुभवी वैद्य की देखरेख में कराना चाहिए ।

पेट गैस एवं पेट फूलना में लाभदायक

अष्ट चूर्णम मे त्रिकटु के अतिरिक्त सेंधा नमक, सफेद जीरा, काला जीरा एवं हींग जैसी जड़ी बूटियों मौजूद होती है । यह सभी जड़ी बूटियां गैस नाशक हैं । इसलिए यह चूर्ण आंतों में बनने वाली गैस को दूर कर देता है । इसके अतिरिक्त यह चूर्ण पेट फूलना एवं पेट गैस की समस्या में बहुत अच्छा आराम पहुंचाता है ।

पेट की गांठ या गोला में लाभदायक

कुछ लोगों को बहुत अधिक गैस बनती है तथा उनका पेट फूला हुआ रहता है । अधिकांश लोगों को यह गैस अपान वायु (पाद) के रूप में शरीर से निकल जाती है लेकिन कुछ लोगों को यह गैस अपान वायु के रूप में नहीं निकलती है तथा पेट में ही गांठ या गोला बन जाता है ।

जिस कारण इस गांठ या गोले के कारण बहुत अधिक कष्ट होता है तथा रोगी बेचैन हो जाता है । इस चूर्ण का सेवन करने से अपान वायु का मार्ग खुल जाता है तथा पेट में बनने वाली गैस शरीर से निकल जाती है, जिससे रोगी को बहुत अच्छा महसूस होता है ।

पेट दर्द में लाभकारी

बहुत अधिक गैस बनने के कारण रोगी के पेट में दर्द होता है । ऐसी स्थिति में इस चूर्ण को गाय के घी के साथ देने से तुरंत लाभ मिल जाता है ।

कब्ज में लाभदायक अष्ट चूर्णम

इस चूर्ण का सेवन करने से कब्ज की समस्या में बहुत अच्छा आराम मिलता है । जिन लोगों को चिपचिपा मल आता हो तथा आधा मल आंतों में ही चिपका रह जाता हो तथा बार-बार शौच जाने की इच्छा रहती हो ऐसी स्थिति में इस चूर्ण का सेवन करने से लाभ मिलता है । यह चूर्ण मल के चिपचिपा पन को दूर करता है तथा मल के निष्कासन (निकासी) में सहायता करता है ।

यह समस्या भोजन के सही प्रकार से पाचन ना होने के कारण होती है । जिस कारण भोजन में चिपचिपाहट एवं बलगम की मात्रा बढ़ जाती है । यह चूर्ण भोजन की चिपचिपाहट एवं बलगम को खत्म करता है एवं मल त्याग में सहायता करता है ।

फैटी लीवर में लाभदायक फर्स्ट वन

यदि लीवर की कोशिकाओं में ट्राइग्लिसराइड्स एवं अन्य प्रकार के लिपिड की मात्रा बढ़ जाए तो ऐसी स्थिति में रोगी फैटी लीवर से ग्रसित हो जाता है । यह स्थति की तब उत्पन्न होती है जब लिपिड और अन्य खाद्य पदार्थों का सही प्रकार से पाचन ना हो पाए ।

परिणाम स्वरूप रोगी के शरीर में आमविश का निर्माण भी हो जाता है, जिससे अन्य कई प्रकार की समस्याएं भी पैदा होती हैं । रोगी के शरीर में सूजन आ जाती है तथा यकृत से संबंधित अन्य रोग पैदा हो जाते हैं । इन सभी समस्याओं में अष्ट चूर्ण बहुत अच्छा लाभ हो पहुंचाता है तथा इन सभी समस्याओं को नष्ट कर देता है ।

अष्ट चूर्णम की खुराक एवं मात्रा

बच्चे (5 से नीचे) 250 से 500 मि.ग्रा
बच्चे (5 से ऊपर) 500 से 1000 मि.ग्रा
वयस्क 1 से 3 ग्राम
अधिकतम संभव खुराक 6 ग्राम प्रति दिन (विभाजित खुराकों में)

अष्ट चूर्ण कैसे लें

मुझे कितनी बार लेना चाहिए? दिन में दो बार
मुझे कब लेना चाहिए? एनोरेक्सिया या भूख न लगने की स्थिति में, Ashta Churnam को भोजन से पहले लेना चाहिए। इसे खराब पाचन, पेट के भारीपन और आंतों की गैस के मामलों में भोजन के बाद लिया जाना चाहिए।

अष्ट चूर्ण के लिए सहायक

भूख में कमी, एनोरेक्सिया, खराब पाचन, पेट में भारीपन, फैटी लिवर रोग, कफ रोग गुनगुने पानी के साथ
आंतों की गैस, पेट फूलना, गैस के कारण पेट में दर्द, वात विकार गाय का घी

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

सामान्यतः इस औषधि का कोई दुष्प्रभाव नहीं है । लेकिन जिन लोगों को पित्त की समस्या हो उन्हें इस चूर्ण का सेवन नहीं करना चाहिए अन्यथा निम्न दुष्प्रभाव प्रकट हो सकते हैं ।

  1. पेट में जलन
  2. उदर में जलन
  3. अम्ल प्रतिवाह
  4. खट्टी डकारें आना
  5. बेचैनी
  6. सिर का चक्कर
  7. अतिरिक्त पित्त के मौजूदा लक्षणों को छोड़ दें

सामान्य प्रश्न

क्या अष्ट चूर्णम (Ashta Choornam) को गर्भावस्था एवं स्तनपान के दौरान प्रयोग किया जा सकता है?

अष्ट चूर्णम (Ashta Choornam) का प्रयोग गर्भावस्था के दौरान नहीं करना चाहिए । क्योंकि इस चूर्ण में हींग मौजूद होता है जो गर्भाशय के संकुचन को बढ़ा सकता है तथा गर्भपात का कारण बन सकता है । स्तनपान कराने वाली माताओं को इस चूर्ण का सेवन चिकित्सक के परामर्श अनुसार ही करना चाहिए ।

क्या इस चूर्ण का उपयोग वजन घटाने के लिए किया जा सकता है?

जी हां इस चूर्ण का उपयोग वजन घटाने के लिए किया जा सकता है । यद्यपि इस चूर्ण का सेवन करने से शुरू शुरू में भूख बढ़ती है लेकिन बाद में भूख सामान्य हो जाती हैं । यह चूर्ण शरीर से अतिरिक्त वसा को कम कर देता है एवं वजन घटाने में सहायक करता है ।

क्या इस चूर्ण को छोटे बच्चों एवं शिशुओं में पेट गैस, पेट फूलना एवं पेट दर्द के लिए प्रयोग किया जा सकता है?

जी हां इस चूर्ण का प्रयोग छोटे बच्चों एवं शिशुओं में पेट की समस्याओं के लिए किया जा सकता है ।

शिशु के लिए इस चूर्ण की निर्धारित मात्रा क्या है?

शिशु एवं छोटे बच्चों के लिए 50 मिलीग्राम चूर्ण को गाय के घी की कुछ बूंदों के साथ देना चाहिए । अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें ।

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