अमृतारिष्ट सिरप के गुण फायदे उपयोग एवं नुक्सान Amritarishta Syrup uses and benefits in hindi

By | April 27, 2020

अमृतारिष्ट क्या है?  Amritarishta in hindi

 
अमृतारिष्ट सिरप (Amritarishta Syrup) एक आयुर्वेदिक एवं हर्बल औषधि है जिसे हम टॉनिक के रूप में इस्तेमाल करते हैं । अमृतारिष्ट का उपयोग मुख्य रूप से जीर्ण ज्वर अर्थात पुराने बुखार, टाइफाइड, जोड़ों के दर्द, पाचन संस्थान की दुर्बलता तथा एनीमिया जैसी समस्याओं में किया जाता है ।
 
अमृतारिष्ट के नाम की बात करें तो हम इस औषधि के नाम को 2 शब्दों में विभाजित कर सकते हैं । अमृता एवं अरिष्ट । अमृता संस्कृत में गिलोय को कहते हैं अर्थात अमृतारिष्ट का अर्थ उस औषधि से है जिसमें अमृता अर्थात गिलोय को प्रमुख औषधि के रूप में प्रयोग किया गया हो ।
 
जैसा कि आप जानते हैं गिलोय का मुख्य कार्य बुखार को दूर करना एवं पाचन संस्थान को सही रखना होता है, इसीलिए अमृतारिष्ट में वह सभी गुण आ जाते हैं जो गिलोय में होते हैं । अमृतारिष्ट में गिलोय के अतिरिक्त अन्य ओषधियां भी प्रयोग की जाती हैं ।
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अमृतारिष्ट के घटक द्रव्य Amritarishta Syrup Ingredients in hindi

✦ गिलोय – 1 किलो
✦ दशमूल – 1 किलो
✦ गुड़ – 3 किलो
✦ जीरा – 60 ग्राम
✦ पित्तपापड़ा – 20 ग्राम
✦ सतोना (सप्तपर्ण) की छाल – 10 ग्राम
✦ काली मिर्च –10 ग्राम
✦ सोंठ – 10 ग्राम
✦ पीपल – 10 ग्राम
✦ नागरमोथा – 10 ग्राम
✦ नागकेसर – 10 ग्राम
✦ अतीस – 10 ग्राम
✦ कुटकी – 10 ग्राम
✦ इन्द्र जौ – 10 ग्राम

अमृतारिष्ट बनाने की विधि How to produce Amritarishta in hindi

सबसे पहले गिलोय एवं दशमूल को ऊपर दी गई मात्रा के अनुसार लेते हैं तथा उन्हें मोटा मोटा कूट लेते हैं । अब इन द्रव्यों को 8 लीटर पानी में डालकर तब तक उबालते हैं जब तक पानी 2 लीटर बाकी ना रह जाए ।जब यह पानी ठंडा हो जाए तो इन ओषधियां को अच्छी तरह मसल लेते हैं तथा मोटे कपड़े का प्रयोग करके इस द्रव्य को जान लेते हैं । इसके पश्चात शेष सभी जड़ी बूटियों को भी कूट पीस के इस द्रव्य में डाल देते हैं ।

अब इस मिश्रण को मिट्टी के बर्तन या किसी चीनी मिट्टी के बर्तन में डालकर ढक्कन से बंद कर देते हैं तथा इस बर्तन का मुंह मिट्टी से अच्छी तरह बंद कर देते हैं ताकि इस बर्तन के अंदर वायु ना जाए । अब इस पात्र को कम से कम 30 दिनों के लिए सुरक्षित स्थान पर रख देते हैं । 30 दिनों के बाद इस द्रव्य को छानकर छोटी-छोटी बोतलों में भरकर रख लेते हैं । इसे ही अमृतारिष्ट कहा जाता है ।

अमृतारिष्ट के फायदे Amritarishta

Syrup use in hindi

पेट की समस्या में लाभकारी अमृतारिष्ट Amritarishta benefits in stamach problems in hindi

अमृतारिष्ट पेट की समस्याओं जैसे अपच अर्थात खाना हजम ना होना, बदहजमी तथा मंदाग्नि जैसी समस्याओं में बहुत अधिक फायदेमंद होता है । अमृतारिष्ट का सेवन करने से पाचन शक्ति बढ़ती है, जिससे खाना बहुत जल्दी हजम होता है ।

इसका सेवन करने से लीवर को नई ऊर्जा और बल मिलता है तथा लीवर से पाचक रसों का स्राव सही मात्रा में होने लगता है । जिससे पाचन क्रिया अच्छी तरह काम करने लगती हैं, भूख खुलकर लगती है । जिससे व्यक्ति को खाया पिया भी लगता है ।

जब खाना सही तरीके से हजम होगा तो खून में हीमोग्लोबिन की कमी भी दूर हो जाती है जिससे रक्ताल्पता अर्थात एनीमिया की समस्या में भी लाभ मिलता है ।

मांसपेशियां सुदृढ़ करने में लाभकारी अमृतारिष्ट Amritarishta benefits in muscles in hindi

जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया अमृतारिष्ट का सेवन करने से यकृत अर्थात लीवर को नई ऊर्जा एवं बल प्राप्त होता है । जिससे यकृत बिल्कुल सही तरीके से काम करने लगता है तथा यकृत से पाचक रसों का स्राव भी उचित मात्रा में होता है ।

जिस कारण भोजन बिल्कुल सही तरीके से हजम होता है । अपच जैसी समस्याएं खत्म हो जाती हैं । जब खाना सही से हजम होगा तो भोजन से रस बनेगा, रस से रक्त बनेगा, रक्त से मास बनेगा, मांस से अस्थि तथा अस्थि से मज्जा बनेगी ।

और इस प्रकार सप्त धातु पुष्ट होने पर शरीर बलवान एवं निरोगी हो जाएगा । इस प्रकार हम कह सकते हैं कि शरीर को सुंदर, सुडोल एवं हष्ट पुष्ट बनाने के लिए अमृतारिष्ट को टॉनिक के रूप में इस्तेमाल करते रहना चाहिए ।

बुखार में लाभकारी अमृतारिष्ट Amritarishta benefits in fever in hindi

अमृतारिष्ट में गिलोय एक मुख्य ओषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है, इसलिए अमृतारिष्ट का सेवन करने से कितना ही पुराना बुखार क्यों ना हो वह भी उतर जाता है । अमृतारिष्ट पुराने बुखार, टाइफाइड, विषम ज्वर, मियादी ज्वार, एवं अन्य प्रकार के बुखार को दूर करने के लिए बहुत ही उत्तम औषधि है ।

बुखार के कारण आई दुर्बलता में लाभकारी अमृतारिष्ट Amritarishta benefits in weakness in hindi

यदि लंबे समय तक बुखार बना रहे तो इसका शरीर पर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव पड़ता है । लंबे समय तक बुखार रहने पर प्लीहा की वृद्धि हो जाती है, पाचन शक्ति क्षीण हो जाती है व खाया पिया हजम नहीं होता है । जिस कारण शरीर में सप्त धातुओं की कमी हो जाती है ।

सप्त धातु की कमी होने से शरीर में खून की कमी हो जाती है, जिससे एनीमिया एवं पीलिया जैसी बीमारियां व्यक्ति को घेर लेती हैं । इस स्थिति में रोगी के पेट में दर्द रहता है, आवाज भारी हो जाती है एवं अन्य कई समस्याएं पैदा हो जाती हैं ।

ऐसे में यदि रोगी को अमृतारिष्ट का सेवन कराया जाए तो धीरे-धीरे पाचन शक्ति दुरुस्त होने लगती है, यकृत को बल मिलने लगता है, खाया पिया हजम होने लगता है, सप्त धातुएं पुष्ट होने लगती हैं तथा रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ने लगती है । जिससे एनीमिया एवं पीलिया रोग धीरे-धीरे दूर हो जाते हैं एवं बुखार के कारण आई कमजोरी दूर हो जाती है ।

शीत ज्वर एवं प्लीहा वृद्धि में लाभकारी अमृतारिष्ट Amritarishta benefits in cold fever in hindi

यदि बुखार ठंड लगकर आता हो एवं इस प्रकार का बुखार काफी लंबे समय तक रहा हो तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति का यकृत एवं प्लीहा बढ़ जाता है । जिस कारण व्यक्ति को ऊपर बताए गए दोष पैदा हो जाते हैं । ऐसी स्थिति में अमृतरिष्ट का सेवन करने से बहुत अधिक लाभ मिलता है । यदि ज्वर की स्थिति बनी हुई हो तो अमृतारिष्ट के साथ महासुदर्शन चूर्ण को लेने से कितना ही भयंकर बुखार क्यों ना हो वह भी उतर जाता है ।

महिलाओं के प्रसूति ज्वर में लाभकारी अमृतारिष्ट Amritarishta benefits in women fever in hindi

अमृतरिष्ट महिलाओं के प्रसूति ज्वर जिसे सूतिका ज्वर भी कहा जाता है, में बहुत अधिक फायदा करता है । यदि संतानोत्पत्ति के पश्चात प्रसूता महिला के द्वारा खानपान एवं रहन सहन में लापरवाही की गई हो तो उस स्थिति में प्रसूता महिला को प्रसूति ज्वर हो जाता है । इस स्थिति में अमृतारिष्ट को प्रताप लंकेश्वर रस के साथ किसी योग्य चिकित्सक की देखरेख में देने से बहुत जल्दी लाभ मिलता है ।

बहुमूत्र में लाभकारी अमृतारिष्ट Amritarishta benefits in urinary infections in hindi

अमृतारिष्ट बहुमूत्र अर्थात बार बार पेशाब का आना जैसी समस्या में बहुत अच्छा फायदा करता है । जैसा कि हमने आपको पर बताया अमृतारिष्ट का प्रमुख घटक द्रव्य गिलोय होता है तथा गिलोय मूत्र संस्थान की कमजोरी जैसे कि बार-बार पेशाब आना, रुक रुक कर पेशाब आना या मूत्र मार्ग के संक्रमण को दूर करने में फायदा करता है । यही कारण है कि अमृतारिष्ट में भी यह सभी गुण आ जाते हैं ।

अमृतारिष्ट के नुकसान Amritarishta Side Effects in hindi

सामान्यता अमृतारिष्ट का कोई दुष्प्रभाव या नुकसान देखने को नहीं मिलता है । लेकिन फिर भी आप इस टोनिक को किसी योग्य चिकित्सक की देखरेख में ही प्रयोग करें ।

मात्रा एवं सेवन विधि Dosage and Directions

व्यस्त पुरुषों एवं महिलाओं को चार चार चम्मच एवं बच्चों को दो-दो चम्मच आधा कप पानी में डालकर भोजन के पश्चात दिया जा सकता है । अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें ।

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