आमवातारि रस के गुण उपयोग फायदे और नुकसान Amavatari Ras ke fayde or nuksan

By | June 22, 2020

आमवातारि रस क्या है? Amavatari Ras kya hai?

आमवातारि रस एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से आम दोष के कारण पैदा होने वाले आमवात एवं गठियाबाय की एक सुप्रसिद्ध एवं सफल औषधि है । इस औषधि का वर्णन आयुर्वेदिक ग्रंथ भैषज्य रत्नावली में किया गया है ।

आमवातारि रस में शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक एवं चित्रकमूल सहित कुछ अन्य औषधियां मौजूद होती हैं । पारे को आयुर्वेद में रस कहा जाता है, इसीलिए इस औषधि को भी रस की संज्ञा दी गई है । क्योंकि इस औषधि में पारा मौजूद होता है जिस कारण यह औषधि बहुत जल्दी अपना प्रभाव भी दिखाती है ।

आमवातारि रस हमारे शरीर में अनावश्यक रूप से बनने वाले आम को नष्ट कर देता है । आम क्या होता है, पहले यह समझना जरूरी है । देखिए, यदि किसी व्यक्ति की जठराग्नि कमजोर हो गई हो जिस कारण वह व्यक्ति अग्निमांद्य से पीड़ित हो गया हो तो ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति का भोजन हजम नहीं होता है, बल्कि पेट में सड़ता है ।

आमवातारि रस इन हिंदी Amavatari Ras in hindi

जिस कारण व्यक्ति अपच का शिकार हो जाता है और पेट में पड़े हुए इस भोजन से विषाक्त पदार्थ पैदा हो जाते हैं । इस विषाक्त पदार्थ को ही आयुर्वेद में आम कहा जाता है । जब यह आम रक्त में जाता है तो शरीर में तरह-तरह की बीमारियां पैदा करता है और यही आम जब वायु के साथ मिल जाता है तो इसे ही आमवात कहा जाता है ।

यह आमवात शरीर में जहां जहां जाता है वहां वहां दर्द और अकड़न पैदा करता है । खासकर यह शरीर के संधि स्थानों जैसे घुटने, कंधों आदि में अपना ज्यादा प्रभाव दिखाता है । इसके अलावा कमर एवं पैरों में भी इसका बहुत ज्यादा प्रभाव रहता है ।

इसे ही आयुर्वेद में आमवात कहा जाता है । आम बोलचाल की भाषा में इसे गठियाबाय भी कह देते हैं । आमवातारि रस सबसे पहले जठराग्नि को प्रदीप्त करता है एवं अग्निमांद्य का नाश करता है जिस कारण व्यक्ति का भोजन सही प्रकार से हजम होता है एवं भोजन से आम की उत्पत्ति होनी बंद हो जाती है ।

जो आम शरीर में पहले से ही मौजूद होता है उसे यह औषधि नष्ट कर देती है, जिस कारण धीरे धीरे आमवात का प्रभाव कम होता चला जाता है एवं रोगी बिल्कुल ठीक हो जाता है । हम आपको यह भी बता दें कि यह समस्या ज्यादातर 45 या 50 वर्ष की आयु के बाद ही होती है क्योंकि इस उम्र में ही व्यक्ति के शरीर में आमदोष पैदा होता है एवं व्यक्ति आमवात या गठियाबाय का रोगी हो जाता है ।

आमवातारि रस के घटक द्रव्य Amavatari Ras ke ghatak dravy

  • शुद्ध पारा १२ ग्राम
  • शुद्ध गंधक २४ ग्राम
  • त्रिफला ३६ ग्राम
  • चित्रकमूल की छाल ४८ ग्राम
  • शुद्ध गुगुल्लू ६० ग्राम
  • भावना द्रव्य: अरंड का तेल।

आमवातारि रस के चिकित्सकीय उपयोग Amavatari Ras ke upyog in hindi

आमवातारि रस को निम्न रोगों के उपचार में सफलतापूर्वक प्रयोग किया जाता है ।

  1. अर्थराइटिस
  2. आमवात
  3. साइटिका (ग्रधसी)
  4. पैरालाइसिस एवं अन्य वात रोग

आमवातारि रस रस के फायदे Amavatari Ras ke fayde in hindi

  1. इस औषधि का सेवन करने से आमदोष के कारण पैदा होने वाला आमवात नष्ट हो जाता है ।
  2. यह औषधि अर्थराइटिस एवं ऑस्टियोपोरोसिस को दूर कर देती है ।
  3. यह औषधि कमर में होने वाले साइटिका रोग के लिए बहुत अच्छा कार्य करती है ।
  4. यह औषधि गंभीर वात विकारों जैसे पक्षाघात (पैरालाइसिस) में भी प्रयोग की जाती है ।
  5. इसके अलावा इस औषधि को अन्य वात रोगों में भी सफलतापूर्वक प्रयोग किया जाता है ।

सेवन विधि एवं मात्रा

इस औषधि की दो-दो गोली दिन में दो बार भोजन के पश्चात गरम पानी, दशमूल क्वाथ या रसनादी क्वाथ के साथ ले सकते हैं । इस दवा का सेवन करते समय एक बात का विशेष ध्यान रखें वह यह है की, इस औषधि को केवल गर्म पानी से ही सेवन करना चाहिए । ठंडे पानी से भूलकर भी इस औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए । अधिक जानकारी के लिए आप अपने संपर्क कर सकते हैं ।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

निर्धारित मात्रा में चिकित्सक के परामर्श अनुसार सेवन करने पर इस औषधि का कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है ।

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