प्रभाकर वटी के गुण उपयोग फायदे और नुकसान Prabhakar Vati ke fayde or nuksan

By | June 13, 2020

प्रभाकर वटी क्या है? Prabhakar Vati kya hai?

प्रभाकर वटी एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से ह्रदय रोगों के लिए प्रयोग की जाती है । इस औषधि का सेवन करने से हृदय का अनियमित रूप से धड़कना, सांस फूलना, सांस लेने में दिक्कत होना, सीने में दर्द होना एवं हृदय की कमजोरी जैसी समस्याओं में बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

इसके अलावा यह औषधि फेफड़ों की कमजोरी, कफ जनित खांसी, लीवर के रोगों जैसे पीलिया, रक्ताल्पता (एनीमिया) एवं शरीर में होने वाली सूजन में भी लाभदायक होती है । यदि अग्निमांद्य्य, खून की कमी, मानसिक अघात, गुर्दों की खराबी, मलेरिया या अन्य संक्रामक रोग के कारण ह्रदय कमजोर हो गया हो तो ऐसी स्थिति में प्रभाकर वटी का सेवन कराना सर्वोत्तम माना जाता है ।

प्रभाकर वटी के घटक द्रव्य Prabhakar Vati ke ghatak dravy

तो इस प्रकार आपने देखा की प्रभाकर वटी में दो-तीन प्रकार की भस्म, शिलाजीत तथा अर्जुन की छाल का चूर्ण मौजूद होता है । स्वर्ण माक्षिक भस्म में पित्त शामक तथा रक्तवर्धक गुण मौजूद होते हैं तथा यह एक रसायन है ।

इसी प्रकार लोह भस्म तथा अभ्रक भस्म भी शक्ति वर्धक, रक्तवर्धक, वीर्य वर्धक एवं वात पित्त को दूर करने वाली होती है । शिलाजीत रक्तवर्धक शक्तिशाली रसायन है, जबकि अर्जुन की छाल हृदय को बल देने वाली सर्वश्रेष्ठ जड़ी बूटियों में सर्वप्रथम गिनी जाती है ।

इस प्रकार प्रभाकर वटी में इन सभी औषधियों की गुण मौजूद होते हैं, जिस कारण यह वटी ह्रदय, फेफड़ों, लीवर इत्यादि अंगों पर अपना बहुत अच्छा प्रभाव दिखाती है ।

प्रभाकर वटी के चिकित्सकीय उपयोग Prabhakar Vati ke upyog in hindi

प्रभाकर वटी निम्न रोगों के उपचार में सफलतापूर्वक प्रयोग की जाती है ।

  1. हृदय की कमजोरी में
  2. सीने में दर्द होने पर
  3. ह्रदय की अनियमित गति में
  4. यकृत (लीवर) के रोगों में
  5. फेफड़ों के संक्रमण में
  6. पीलिया (पांडु रोग) में
  7. एनीमिया (खून की कमी) में
  8. कमजोरी, चक्कर आना तथा अनिद्रा जैसी समस्या में

प्रभाकर वटी के फायदे Prabhakar Vati ke fayde in hindi

हृदय रोगों में लाभकारी प्रभाकर वटी Prabhakar Vati ke fayde heart problem me

प्रभाकर वटी में अर्जुन की छाल के अलावा अन्य जितने भी जड़ी बूटियां एवं भस्मे मौजूद होती हैं, यह सभी ह्रदय वहिनी नाडियो के ऊपर अपना सकारात्मक प्रभाव दिखाती हैं । प्रभाकर वटी सभी प्रकार के हृदय रोगों को दूर करती हैं ।

प्रभाकर वटी का सेवन करने से हृदय से जुड़ी हुई  धमनिया एवं वात नाडिया सुचारू रूप से कार्य करती हैं । हृदय रोगियों को प्रभाकर वटी के साथ ह्रदय चिंतामणि रस, वृद्ध वात चिंतामणि रस, विश्वेश्वर रस,  शंकर वटी इत्यादि का सेवन कराया जा सकता है ।

उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) में लाभकारी प्रभाकर वटी Prabhakar Vati ke fayde high blood pressure me

बहुत अधिक अम्ल पित्त बढ़ जाने के कारण या किसी भी प्रकार की चिंता, भय या मानसिक रोग के कारण यदि रक्तचाप बढ़ जाए तो ऐसी स्थिति में प्रभाकर वटी की एक एक गोली सुबह शाम ताजे पानी से भोजन के पश्चात रोगी को सेवन कराई जाती है, इससे बहुत अच्छा लाभ मिलता है । सहायक औषधियों के रूप में व्योशादी चूर्ण, नवक गूगल एवं विश्वेश्वर रस आदि का सेवन कराने से लाभ जल्दी मिलता है ।

खून की कमी (एनीमिया) मैं लाभकारी प्रभाकर वटी Prabhakar Vati ke fayde anemia me

प्रभाकर वटी में स्वर्ण माक्षिक भस्म, लोह भसम तथा अभ्रक भस्म जैसी औषधियां मौजूद होती हैं । यह सभी औषधियां खून की कमी अर्थात एनीमिया को दूर करने के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती हैं ।

यदि किसी रोगी को खून की कमी हो जाए तो ऐसे रोगी को मात्र 10 से 15 दिन तक ही प्रभाकर वटी का सेवन कराने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है । यदि किसी रोगी को पीलिया (पांडु रोग) हो जाए तो इस औषधि का सेवन 40 दिन तक करने से पूर्ण लाभ मिल जाता है ।

यह औषधि लीवर से जुड़े हुए इन रोगों को दूर करने के लिए बहुत अच्छा कार्य करती हैं । इस औषधि के साथ सहायक औषधियों के रूप में पुनर्नवादि मंडूर एवं ताप्यादि लोगों में से किसी एक का प्रयोग कराया जा सकता है, जिससे लाभ ज्यादा मिलता है ।

किडनी रोगों में लाभकारी प्रभाकर वटी Prabhakar Vati ke fayde kidney problems me

यदि किसी रोगी की किसी भी कारण से किडनी में थोड़ी बहुत खराबी आ गई हो तो इससे रोगी के शरीर में कई लक्षण प्रकट होते हैं, जैसे कि सबसे पहले तो रोगी के शरीर में खून की कमी होने लगती है, रक्त में विषैले पदार्थों की उपस्थिति बढ़ने लगती है, अस्थि मज्जा में रक्त कणों के निर्माण में कमी आ जाती है इत्यादि, जिससे धीरे-धीरे रोगी कमजोर एवं निस्तेज होता चला जाता है ।

यदि इस रोग का सही समय पर उपचार न कराया जाए तो रोगी की मृत्यु तक भी हो सकती हैं, इसलिए यदि किडनी रोग की शुरुआती अवस्था हो तो ऐसे में प्रभाकर वटी को नारियल पानी के साथ एक एक गोली सुबह शाम भोजन के पश्चात सेवन कराने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

इस औषधि का सेवन करने से रोगी का रक्तचाप नियंत्रित रहता है तथा रक्त कणों का निर्माण बड़ी तेजी से होता है, जिससे रोगी के शरीर में खून की एवं प्लेटलेट्स की पूर्ति बड़ी तेजी से हो जाती है । इस औषधि के साथ सहायक औषधियों के रूप में कामदुधा रस, वरुणादि क्वाथ आदि का सेवन करने से लाभ मिलता है ।

सर्वांग शोथ (सूजन) दूर करने में लाभकारी प्रभाकर वटी Prabhakar Vati ke fayde sujan me

यदि गुर्दों की कमी के कारण या किसी अन्य कारण से शरीर में सूजन आ गई हो, तो ऐसी स्थिति में प्रभाकर वटी को पुनर्नवाष्टक क्वाथ के साथ सेवन कराने से कुछ ही दिनों में सूजन उतर जाती है ।

इस औषधि का सेवन इस रोग में अधिकतम 40 दिनों तक ही किया जाना चाहिए । यदि 40 दिन के पश्चात भी सूजन ना उतरे तो तुरंत ही किसी योग्य चिकित्सक से मिलना चाहिए । उपरोक्त औषधियों के अलावा सहायक औषधि के रूप में पुनर्नवादि मंडूर का सेवन कराने से जल्दी लाभ मिलता है ।

पुरानी खांसी में लाभकारी प्रभाकर वटी Prabhakar Vati ke fayde purani khansi me

यदि फेफड़ों में संक्रमण के कारण या किसी अन्य कारण से रोगी को खांसी की समस्या हो गई हो तथा खांसी 2 सप्ताह से ज्यादा पुरानी हो गई हो तो ऐसी स्थिति में प्रभाकर वटी का सेवन कराने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।

यदि खांसी 2 सप्ताह से ज्यादा पुरानी हो जाए तो ही उसे पुरानी खांसी कहा जाता है । इसके अतिरिक्त यदि रोगी को जुखाम या सिर दर्द रहता हो, थोड़ा सा कार्य करने पर ही रोगी थक जाता हो तथा सांस फूलने लगता हो, खून की कमी हो गई हो, भूख कम लगती हो, तो इन सभी स्थितियों में प्रभाकर वटी को सुबह दोपहर शाम शहद के साथ चटा कर ऊपर से गर्म दूध पिलाने से लाभ मिलता है ।

सहायक औषधियों के रूप में सितोपलादि चूर्ण एवं स्वर्ण बसंत मालती रस का सेवन करने से बहुत जल्दी लाभ मिलता है ।

मात्रा एवं सेवन विधि

प्रभाकर वटी की एक गोली से लेकर 2 गोली तक दिन में दो बार सुबह एवं शाम भोजन के पश्चात ताजे पानी के साथ ले सकते हैं । अलग-अलग रोगों में प्रभाकर वटी को लेने का अनुपान अलग-अलग है । खांसी में प्रभाकर वटी को शहद के साथ चाटकर मिश्री मिले दूध के साथ लेने से लाभ मिलता है । प्रभाकर वटी की एक गोली 250 मिलीग्राम की होती है । अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं ।

सावधानियां एवं दुष्प्रभाव

निर्धारित मात्रा में चिकित्सक की सलाह के अनुसार लेने पर प्रभाकर वटी का कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है । इस औषधि को अधिक मात्रा में नहीं लेना चाहिए ।

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